Wednesday, 1 February, 2012

प्रभात 33

रोज सवेरे जब मैं जागूँ
स्वयं से ही ये पूछूं मैं

कहो जिंदगी खुश हो मुझसे
या भली तुमको न लगूँ मैं
होठों पर मुस्कान हूँ रखती
फिर सबको मुस्कान दे जाऊं मैं
ऐ जिंदगी मुझसे खफा न रहना
आंसू में भी देख तो मुस्काऊँ मैं
शुभ दिवस

22-10-2011

 
roj savere jab main jaagoon
khud se hi ye poochhoon main
kaho jindagi khush ho mujhse
ya bhali tumko na lagoon main
hothon par muskaan hun rakhti
fir sabko muskaan de jaaoon main
ae jingadi mujhse khafa na rehna
aansu mein bhi dekh to muskaaoon main
shubh diwas



2 comments:

  1. वाह ...बहुत खूब प्रीति जी।
    शुभ दिवस!


    सादर

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  2. जिन्दगी जीने का सुन्दर अहसास कराने वाली सुन्दर एवं प्रभावित करने वाली रचना....
    बधाई.......
    कृपया इसे भी पढ़े
    नेता,कुत्ता और वेश्या

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