Monday 30 January 2012

प्रभात 31


पलकों  को  खोलते  ही  मैं  जिंदगी  को  देख  मुस्काई

बढ़कर  उमंग  से  मैंने  गले  लगाया   कहा - जीने  आई
संग  अपने  आशा, विश्वास  और  दिल  से  सुकामनाएं  लाई
नन्हे  की  गीली  आँखों  में  चमक  भरने  को  स्नेहिल  दिल  लाई
सुप्रभात




15-11-2011

palkon ko kholte hi mai jindagi ko dekh muskai
badhkar umang se maine gale lagaya kaha - jeene aayi
sang apne asha, vishwas aur dil se sukamnayein layi
nanhe ki gili aankhon mein chamak bharne ko snehil dil laai
suprabhat

1 comment:

  1. "नन्हे की गीली आँखों में चमक भरने को स्नेहिल दिल लाई "

    बहुत ही खूबसूरत।

    सादर

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