Monday, 31 October, 2011

प्रभात 16

हे कलुषित ह्रदय तू क्यों मुझे तड़पाता है
क्यों मेरी स्वच्छ अत्त्मा की पुकार नहीं सुनता है
मैं एक नए दिवस की तरह पुरानी कडवाहट मिटाना चाहती हूँ
एक नयी चेतना, नए स्वच्छ दिवस का ह्रदय से आह्वाहन करती हूँ
शुभ प्रभात


he kalushit hriday tu kyu mujhe tadpata hai
kyu meri swachh attma ki pukar nahi sunta hai
mai ek naye diwas ki tarah purani kadwahat mitana chahti hun
ek nayi chetna, naye swachh diwas ka hriday se ahwahan karti hun
shubh prabhat
October 2 at 10:48am

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