Monday, 31 October, 2011

प्रभात 15


फिर कलियाँ मुस्काई हैं फिर चली पुरवाई है
नए सपने आँखों में लिए ह्रदय ने ली अंगडाई है
नया दिवस नयी आशा नयी नयी फिर चाह है
ह्रदय चक्षु खोलो जीवन रहस्य तुम्हारे ही पास है
शुभ प्रभात


September 30 at 10:00am

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